एक अधीक्षक, दो प्रभार, फिर भी धन पाने को बेकरार!
रिटायरमेंट से पहले दोनों जेलों में खूब मचा रखी लूट राजधानी की जिला जेल के साथ आदर्श कारागार का भी प्रभार आईजी जेल को नहीं दिख रहा लखनऊ की जेलों में चल रहा भ्रष्टाचार
लखनऊ। एक अधीक्षक, दो जेलों का प्रभार फिर भी धन पाने के लिए बेकरार है। यह बात राजधानी की जिला जेल अधीक्षक पर बिल्कुल फिट बैठती है। कारागार मुख्यालय में बैठे आला अफसरों ने लखनऊ जेल के साथ इन्हें आदर्श कारागार का भी अतिरिक्त प्रभार सौंप रखा है। करीब दो माह बाद सेवानिवृत होने वाले इस अधीक्षक ने लखनऊ जेल के साथ आदर्श कारागार में भी लूट मचा रखी है। अधीक्षक कमाई को बढ़ाने के लिए बंदियों को घटिया भोजन परोस कर कैंटीन की बिक्री में बढ़ोत्तरी कर जेब भरने में जुट हैं वही दूसरी ओर आदर्श कारागार में चहेते अधिकारी को सभी महत्वपूर्ण उद्योगों के प्रभार सौंपकर अलग से कमाई का जरिया ढूंढ निकाला है। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि ऐसा तब किया जा रहा है जब रिटायरमेंट से छह माह पूर्व किसी भी अधिकारी को वित्तीय लाभ वाले पद पर तैनात किए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है।
मिली जानकारी के मुताबिक आईजी जेल ने लखनऊ जेल के अधीक्षक बृजेंद्र सिंह को जिला जेल के साथ आदर्श कारागार का भी अतिरिक्त प्रभार सौंप रखा है। प्रदेश के जेलों की बात छोड़िए आईजी जेल को नाक के नीचे की राजधानी की जिला जेल और आदर्श कारागार का भ्रष्टाचार दिखाई नहीं पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि लखनऊ जेल में लाखों में कैंटीन का ठेका उठाकर जेल अधिकारी कमाई का कोई मौका छोड़ना नहीं चाह रहे हैं। बंदियों को घटिया भोजन परोस कर जेल अधिकारी कैंटीन की कमाई से जेब भरने में जुटे हुए है। आलम यह है कि जेलों में बंदियों को कैंटीन से पूड़ी सब्जी, छोला भटूरा खिलाकर नाश्ते में मिलने वाली खाद्य सामग्री बचाकर प्रतिमाह लाखों रूपये की कमाई करने में जुटे हुए है।
राजधानी की आदर्श कारागार प्रदेश की एक मात्र ऐसी जेल है जहां प्रदेश भर की जेलों से चयनित फर्स्ट अफेंडर कैदियों को ही रखा जाता है। अफसरों की खाऊं कमाऊ नीति से जेल के नियमों को दर किनार कर कैदियों को लाया गया है। खूंखार कैदियों के आने से जेल की व्यवस्थाएं अस्त व्यस्त हो गई है। लाए गए कैदियों की जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। जेल के अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। |
सूत्रों का कहना है कि राजधानी की जिला जेल के साथ आदर्श कारागार में भी अधीक्षक ने व्यवस्थाओं को अस्त व्यस्त कर रखा है। कारागार में कैदी पुनर्वास के लिए चलाए जा रहे उद्योगों का प्रभार अपने चहेते अधिकारियों को सौंप रखा है। जेल में उद्योगों के मेंटीनेंस के नाम पर प्रतिमाह लाखों के बारे न्यारे किए जा रहे है। इसके साथ ही मोटा पैसा लेकर नियम विरुद्ध तरीके के कैदियों को स्कीम के तहत जेल से बाहर कारोबार करने के लिए भेजा जा रहा है। बीते दिनों कैदी पुनर्वास योजना के तहत जिला जेल के प्रवेश गेट पर परचून की दुकान लगाने वाले कैदी से बाहर से आए एक मुलाकाती ने पूछा कि जेल में हाता और मशक्कत के लिए क्या लिया जाता है। उसने बताया 3500 रुपए लिया जा रहा है। शिकायत होने पर प्रभारी अधीक्षक ने वसूली करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए स्कीम के कैदी को ही जेल मे वापस कर दिया।


