महंगाई भत्ता भुगतान के लिए संघ व चीनी मिलों ने खोला मोर्चा
• 7 को संघ मुख्यालय पर प्रदर्शन और मंत्री आवास तक होगी पदयात्रा • 30 अक्टूबर से चीनी मिलों में काली पट्टी बांधकर हो रहा विरोध प्रदर्शन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ एवं चीनी मिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने महंगाई भत्ते का भुगतान कराने के लिए आरपार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। इसके तहत चीनी मिल अधिकारी परिषद और चीनी मिल और आसवनी वेलफेयर एसोसिएशन ने 7 नवंबर को चीनी मिल संघ कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर गन्ना मं कराने के लिए आरपार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। इसके तहत चीनी मिल अधिकारी परिषद और चीनी मिल और आसवनी वेलफेयर एसोसिएशन ने 7 नवंबर को चीनी मिल संघ कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर गन्ना मंत्री के आवास तक पैदल मार्च करने का ऐलान किया है। अधिकारी और कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 17 प्रतिशत मंहगाई भत्ते का तत्काल भुगतान त्री के आवास तक पैदल मार्च करने का ऐलान किया है। अधिकारी और कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 17 प्रतिशत मंहगाई भत्ते का तत्काल भुगतान कराया जाए। मांग पूरी नहीं होने पर वह टूल डाउन और पेन डाउन की कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।
चीनी मिल अधिकारी परिषद और चीनी मिल एवं आसवनी वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश की 24 सहकारी चीनी मिलों में अधिकारियों और कर्मचारियों का बकाया 17 प्रतिशत मंगाई भत्ता एवं अन्य मांगे पूरी नहीं की गई है। इन मांगों को लेकर चीनी मिलो के अधिकारियों और कर्मचारियों ने 30 अक्टूबर से 6 नवंबर तक हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। 7 नवंबर को प्रदेश की सभी चीनी मिलों के हजारों अधिकारी और कर्मचारी राजधानी लखनऊ पहुंचकर सहकारी चीनी मिल संघ के मुख्यालय पर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान संघ के मुखिया को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
चीनी मिल अधिकारी परिषद के अध्यक्ष सूर्यपाल सिंह एवं चीनी मिल व आसवानी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कालूराम ने बताया कि संघ मुख्यालय पर प्रदर्शन और ज्ञापन देने के उपरांत समस्त कर्मचारी और अधिकारी संघ मुख्यालय से चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के आवास तक पैदल मार्च करेंगे। उन्होंने बताया कि यदि 7 नवंबर तक उनकी तीन मांगों को नहीं माना गया तो सभी सहकारी चीनी मिलों में अधिकारी और कर्मचारियों को टूल डाउन और पेन डाउन की कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।


