भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी पीएम आवास योजना,अपात्र लोगों को मिल रहा आवास

उत्तराखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। अफसरों, बिल्डरों और दलालों की मिलीभगत से अपात्र लोगों को फ्लैट आवंटित किए गए, जबकि पात्र लाभार्थी वंचित रह गए। गाजियाबाद के दलाल संदीप चौधरी पर आरोप है कि उसने दस्तावेजों में हेरफेर कर अपात्र व्यक्तियों को फ्लैट दिलाने में अहम भूमिका निभाई। फ्लैट की तय कीमत 3.5 लाख थी, लेकिन अपात्रों से 6-7 लाख रुपए वसूले गए। मामले में उत्तराखंड और केंद्र सरकार से सख्त जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी पीएम आवास योजना,अपात्र लोगों को मिल रहा आवास
पीएम आवास योजना

देहरादून। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), जो भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, का उद्देश्य गरीब एवं मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ती और सुलभ आवास सुविधा प्रदान करना है। हालांकि, उत्तराखंड में इस योजना के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं।  

सूत्रों के अनुसार, कई अपात्र व्यक्तियों को सरकारी अधिकारियों, बिल्डरों और दलालों की मिलीभगत से आवास आवंटित किए गए। वहीं, योजना के तहत पात्र और जरूरतमंद लाभार्थी इस सुविधा से वंचित रह गए। बताया गया है कि आवास आवंटन प्रक्रिया में पात्रता सत्यापन में हेरफेर की गई और पक्के मकान वाले अमीर व्यक्तियों को भी योजना का लाभ दिया गया।  

ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट की कीमत 3.5 लाख रुपये तय की गई थी, लेकिन अपात्र लाभार्थियों से 6-7 लाख रुपये तक वसूले गए। मामले में नोएडा के एक बिल्डर ने अलग-अलग नाम से कंपनियां बनाकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट निर्माण के टेंडर हासिल किए। इनमें *ओजस स्मार्ट होम्स प्राइवेट लिमिटेड* और *ओजस इंटरिओ प्राइवेट लिमिटेड* शामिल हैं। इन कंपनियों ने रुद्रपुर, काशीपुर और अन्य क्षेत्रों में फ्लैट निर्माण का काम लिया। 

गाजियाबाद के संदीप चौधरी नामक एक दलाल पर आरोप है कि उसने दूसरे राज्यों के लोगों के दस्तावेजों में हेरफेर कर उनका पता बदलवाया और उन्हें फ्लैट आवंटित करवाया। इसके अलावा, उसने अपने व्यक्तिगत खातों में रुपए ट्रांसफर कराकर अपात्र लाभार्थियों से भारी धनराशि वसूली। राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अपात्र लोगों को भी सात लाख रुपये लेकर योजना के तहत फ्लैट आवंटित किए गए। 

यह खुलासा हुआ है कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से पात्रता की जांच प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। इस मामले में शामिल दलाल, बिल्डर और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। राज्य और केंद्र सरकार से इस प्रकरण की गंभीरता से जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को उनका हक मिल सके।  

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीबों को आश्रय देना है। ऐसे में भ्रष्टाचार के कारण योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।