वसूली की खातिर आईपीएस के अंडर में काम कर रहा आईएएस!

कारागार मुख्यालय में सीनियर पीसीएस के बजाए आईएएस की हुई तैनाती अपर महानिरीक्षक कारागार (प्रशासन) के पद पर हुई तैनाती

वसूली की खातिर आईपीएस के अंडर में काम कर रहा आईएएस!
कारागार मुख्यालय

लखनऊ। प्रदेश के कारागार मुख्यालय में आईपीएस के अंडर में आईएएस काम कर रहा है। यह बात सुनने में भले ही अटपटी लगे लेकिन इस सच को कारागार विभाग के मुख्यालय में आसानी से देखा जा सकता है। शासन ने मुख्यालय में अपर महानिरीक्षक कारागार (प्रशासन) के पद पर सीनियर पीसीएस तैनात करने के बजाए आईएएस को तैनात कर दिया। ऐसा तब किया गया है जब पूर्व में एआईजी कारागार प्रशासन के पद पर सीनियर पीसीएस की ही तैनाती होती रही है। स्थानांतरण सत्र के दौरान मोटी रकम लेकर बेतरतीब तरीके से किए गए तबादलों को लेकर एआईजी प्रशासन ने खूब सुर्खियां बटोरीं। हकीकत यह है कि बेतहाशा वसूली के चलते अब यह विभाग छोड़ना ही नहीं चाहते है। उधर विभागीय मंत्री समय अन्य आला अफसरों ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साध रखी है। 

मिली जानकारी के मुताबिक जून 2024 में शासन ने प्रोन्नत आईएएस धर्मेंद्र सिंह को कारागार मुख्यालय में अपर महानिरीक्षक कारागार (प्रशासन) के पद पर तैनात किया था। सूत्रों का कहना है शासन में सेटिंग गेटिंग करके नियम विरुद्ध तरीके से जुगाड़ के बल पर इनकी तैनाती कराई गई। नियमानुसार एआईजी कारागार प्रशासन के पद पर सीनियर पीसीएस की तैनाती होती रही है। सूत्रों की माने तो जो अधिकारी इस पद पर एक बार आ जाता है तो वह फिर जाने का नाम नहीं लेता है। मोटी कमाई होने की वजह से कोई भी अधिकारी इस पद को आसानी से छोड़ने को तैयार ही नहीं होता है।

मुख्यालय के समस्त कमाऊ प्रभार एआईजी के पास!
कारागार मुख्यालय में एआईजी प्रशासन का महत्वपूर्ण पद है। जिसमें मोटा कमिशन और अवैध वसूली की पूरी व्यवस्थाएं है। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान समय में एआईजी प्रशासन के पास गोपनीय (जेलर से लेकर डीआईजी तक की विभागीय कार्यवाही, तबादले इत्यादि), अधिष्ठान एक (डिप्टी जेलर, हेड वार्डर और वार्डर के तबादले और विभागीय कार्यवाही), अधिष्ठान दो (फार्मासिस्ट, मुख्यालय और जेलों के बाबुओं के तबादले), आधुनिकीकरण (जेलों के लिए आधुनिक उपकरणों की खरीद फरोख्त), उद्योग (जेलों में संचालित उद्योगों के रा मटेरियल की खरीद फरोख्त) के अलावा कई अन्य ऐसे प्रभार है जिनमें मोटा कमिशन और कमाई के तमाम स्रोत है। इनसे होने वाली मोटी कमाई की वजह से वह आईएएस अधिकारी होकर भी आईपीएस अधिकारी के अंडर में काम कर रहे है। मुख्यालय में एआईजी कारागार प्रशासन होने से उनका प्रदेश के सभी जनपदों में जलवा बरकरार है

सूत्रों का कहना है कि बीते स्थानांतरण सत्र में एआईजी कारागार प्रशासन ने नए डीजी जेल को गुमराह करके सैकड़ों की संख्या में जेल अधिकारियों और कर्मियों के तबादले किए। इन तबादलों में अधिकारियों से मोटी रकम लेकर उन्हें उनके मनमाफिक कमाऊ जेलों पर तैनात कर दिया। अवैध वसूली के चलते एक एक जेलर के तीन तीन बार तबादले बदल दिए गए। झांसी जेल पर तैनात जेलर को पहले फतेहगढ़ जिला जेल, कुछ समय बाद सुल्तानपुर जेल और इसके कुछ दिन बाद ही उनकी विशेष ड्यूटी बागपत जेल पर लगा दी गई। इसी प्रकार आजमगढ़ में तैनात जेलर को पहले झांसी, इसके बाद गाजियाबाद जेल पर तैनाती की गई। इसके चंद दिनों बाद ही उसकी विशेष ड्यूटी फिरोजाबाद जेल पर लगा दी गई। यह तो बानगी है इस प्रकार एआईजी प्रशासन ने कई जेलों से अधिकारियों को स्थानांतरित तो कर दिया किंतु स्थानांतरित अधिकारियों की जगह पर किसी को तैनात ही नहीं किया है। इसको वजह से दर्जनों अधिकारी स्थानांतरित होने के बाद काफी दिनों तक रिलीव ही नहीं हो पाए। इन तमाम अव्यवस्थाओं के बाद भी शासन ने एआईजी कारागार प्रशासन के खिलाफ कोई कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। उधर इस संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।