आईजी का आदेश नहीं मानते एआईजी जेल!
प्रदेश की जेलों से विलासिता और खानपान की महंगी वस्तुएं मंगाने की शिकायत पर छह माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आईजी जेल ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन एआईजी प्रशासन ने शिकायत को फाइलों में ही दबा दिया। मामले को उच्च अधिकारियों से जुड़ा होने के कारण दबाने की चर्चा है। वहीं, आईजी की लचर कार्यप्रणाली से जेल अधिकारी भी बेखौफ हो गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर कार्रवाई न होने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
कारागार मुख्यालय का अजब गजब कारनामा
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जेलों पर पर्ची भेजकर सामान मंगवाने की शिकायत का मामला
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आदेश के बाद भी एआईजी ने फाइलों में दबाई शिकायत
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छह माह बाद भी मामले में नहीं हुई कोई कार्रवाई
लखनऊ। महानिरीक्षक (आईजी) कारागार का आदेश अपर महानिरीक्षक (एआईजी) कारागार प्रशासन के लिए कोई मायने नहीं रखता है। यही वजह है छह माह पूर्व की गई शिकायत पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। एक समाजसेवी ने एआईजी कैंप कार्यालय से प्रदेश की जेलों से विलासिता की वस्तुओं के साथ खानपान की वस्तुएं मंगाए जाने की शिकायत की थी। आईजी ने शिकायती पत्र की जांच एआईजी को सौंपकर जांच रिपोर्ट पेश करने के साथ दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इस शिकायत को हुए करीब छ माह से अधिक का समय बीत गया। मामला कैंप कार्यालय से जुड़ा होने के कारण एआईजी जेल ने आईजी जेल को रिपोर्ट देना तो दूर की बात पूरे मामले को फाइलों में ही दबा दिया है। यह मामला मुख्यालय कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि मामला उच्च अधिकारी से जुड़ा होने की वजह से इसे दबाया जा रहा है। उधर मुख्यालय का कोई भी अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहा है।
मामला सितंबर 2024 के प्रथम सप्ताह का है। गोमतीनगर के एक समाजसेवी ने कारागार मुख्यालय को एक शिकायती पत्र भेजा था। पत्र में आरोप लगाया था कि मुख्यालय में एआईजी कैंप कार्यालय से प्रदेश की लखनऊ, रायबरेली, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव समेत कई जेलों से विलासिता की वस्तुएं मसलन रूम हीटर, ब्लोवर, पास वर्ड कोडिंग ताले, क्रॉकरी इत्यादि के साथ खानपान की वस्तुएं बांसमती चावल, चीनी, चायपत्ती, इडली पेस्ट, कॉम्प्लान इत्यादि जैसी महंगी वस्तुएं मंगाई जा रही है। विभाग के मुखिया ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच एआईजी जेल प्रशासन को सौंपी थी। आईजी जेल को जांच सौंपे हुए करीब छह माह से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक शिकायत पर न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही कोई जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसको लेकर मुख्यालय कर्मियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
कार्रवाई नहीं होने से बेखौफ हुए जेल अफसर!
आईजी जेल के कार्रवाई नहीं करने से मुख्यालय तो मुख्यालय जेलों के अधिकारी भी बेलगाम हो गए है। विभाग के मुखिया ने भ्रष्टाचार को लेकर हुई शिकायत पर तो कोई कार्रवाई नहीं की किन्तु राजधानी से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर फतेहगढ़ जिला जेल के अधीक्षक और जेलर को तुरन्त ही हटा दिया। इसी प्रकार एटा जेल के दो वीडियो वायरल होने के बाद भी आरोपी अधिकारी के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रोटोकॉल का अनुपालन नहीं करने पर रायबरेली जेल अधीक्षक तो हटा दिया किन्तु मुजफ्फरनगर जेल पर मुलाकात करने गए सासंद को बैरंग वापस कर दिया गया इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई। आईजी की लचर कार्यप्रणाली से अब जेल अफसर बेखौफ होते जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि मामले की शिकायत प्रमाणों के साथ की गई थी। एआईजी प्रशासन के कैंप कार्यालय से मामला जुड़ा होने की वजह से आला अफसर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए उन्हें बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। यही वजह है कि छह माह पहले दी गई जांच अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। एआईजी ने शिकायत की जांच करने के बजाय उसको ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उधर इस संबंध में जब एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया। आईजी जेल की पीआरओ ने कहा कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में ही नहीं है।


