आरोपी डिप्टी जेलरों को बचाने के लिए हटाए गवाहों के बयान!
डीआईजी की आयोग को भेजी गई आख्या से हुआ खुलासा दोषियों के बजाए शिकायतकर्ता को फंसाने में जुटा जेल प्रशासन
आदर्श कारागार में प्रशिक्षक से मारपीट का मामला
लखनऊ। आदर्श कारागार के अधिकारियों के आए दिन अजब गजब कारनामे सामने आ रहे हैं। कारागार के जेलर कार्यालय में हुई मारपीट के मामले में आरोपी डिप्टी जेलरों को बचाने के शिकायतकर्ता प्रशिक्षक के गवाहों के बयान ही हटा दिए गए। घटना की जांच करने वाले परिक्षेत्र के डीआईजी की आयोग को भेजी गई आख्या में इसका खुलासा हुआ है। जेल प्रशासन के अधिकारी दोषियों को बचाकर शिकायतकर्ता को ही फंसाने की कवायद में जुटे हुए है। यह मामला जेलकर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि विभाग के आला अफसर दोषी अधिकारियों के बजाए शिकायतकर्ता को ही फंसाकर मामले को रफा दफा करने की फ़िराख में लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 में आदर्श कारागार में तत्कालीन जेलर अजय राय के कार्यालय में किसी बात को लेकर डिप्टी जेलर डीपी सिंह और अजीत सिंह की प्रशिक्षक अजय शुक्ला से कहासुनी हो गई। आक्रोशित डिप्टी जेलरों ने जेलर कार्यालय में ही प्रशिक्षक की जमकर पिटाई कर दी। पिटाई का शिकार हुए प्रशिक्षक ने इसकी शिकायत कारागार मंत्री, महानिरीक्षक कारागार, मानवाधिकार आयोग समेत अन्य उच्चाधिकारियों से की। आईजी जेल ने घटना की प्राथमिक जांच तत्कालीन अधीक्षक को और विस्तृत जांच लखनऊ परिक्षेत्र के डीआईजी को सौंपी। जांच अधिकारियो ने चुनिंदा कर्मियों के बयान लेकर जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
| आदर्श कारागार के प्रशिक्षक के साथ मारपीट करने वाले दो डिप्टी जेलर डीपी सिंह और अजीत सिंह में अजीत सिंह को आदर्श कारागार से तीन माह के अस्थाई ड्यूटी पर श्रावस्ती जेल पर लगा दिया गया जबकि दूसरे आरोपी डिप्टी जेलर डीपी सिंह अभी भी इसी जेल पर जमे हुए है। सूत्रों का कहना है कि मामला आयोग में चलने और कार्रवाई के डर से डिप्टी जेलर को जेल से हटाकर बचा लिया गया। आईजी जेल के निर्देश पर डिप्टी जेलर अजीत सिंह को बीती 11 मार्च को श्रावस्ती जेल पर अस्थाई ड्यूटी के लिए लगाया गया था। आदर्श कारागर का प्रशासन देख रहे लखनऊ जिला जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह ने उन्हें चार दिन पहले रिलीव किया है। रिलीव होने के दो दिन बाद तक वह आदर्श कारागार में देखे गए। इसकी पुष्टि कारागार में लगे सीसीटीवी से की जा सकती है। |
सूत्र बताते है कि प्रशिक्षक ने इसकी जो शिकायत आयोग से की थी उसमें आयोग ने जांच अधिकारी (डीआईजी लखनऊ परिक्षेत्र) से मामले की आख्या मांगी। डीआईजी ने आयोग को जो आख्या भेजी है उसमें शिकायतकर्ता के गवाहों को ही हटा दिया है। सूत्र बताते है कि घटना की प्राथमिक जांच करने वाले तत्कालीन अधीक्षक ने पीड़ित प्रशिक्षक समेत तीन लोगों के बयान लिए थे जबकि डीआईजी ने पीड़ित को छोड़कर छह कर्मियों के बयान दर्ज किए। आयोग को भेजी गई आख्या में पीड़ित पक्ष के गवाहों को हटाकर शिकायतकर्ता को ही फंसाकर मामले को निपटाने की फ़िराख में जुटे हुए है। इस संबंध में जब डीआईजी रामधनी से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन ही नहीं उठा।


