सुधरने के बजाए बिगड़ रही जेल मुख्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था!
अराजपत्रित महिला कर्मी के बजाए राजपत्रित अधिकारी हटाया अभी भी महिला कर्मियों की एआईजी कैंप कार्यालय में लग रही अटेंडेंस
लखनऊ। अपर महानिरीक्षक कारागार प्रशासन (एआईजी) कारागार मुख्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के बजाए बिगाड़ रहे है। यह बात सुनने और पढ़ने में भले ही अटपटी लगे लेकिन पटल परिवर्तन ने इसको सच साबित कर दिया है। एआईजी प्रशासन ने पहले अराजपत्रित महिलाकर्मी के मातहत राजपत्रित अधिकारी को तैनात कर दिया। मामला सुर्खियों में आया तो एआईजी प्रशासन ने महिलाकर्मी के बजाए राजपत्रित अधिकारी को ही हटा दिया। यह मामला कारागार मुख्यालय के कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक बीती 20 मार्च 2025 को एआईजी प्रशासन ने कारागार मुख्यालय में तैनात करीब आधा दर्जन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और एक वरिष्ठ सहायक का पटल परिवर्तन का एक आदेश जारी किया है। इस पटल परिवर्तन में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। बीती 26 फरवरी को किए गए पटल परिवर्तन में एआईजी प्रशासन ने एक अराजपत्रित महिला कर्मी के अंडर में राजपत्रित अधिकारी को तैनात कर दिया था। मामला सुर्खियों में आने के बाद एआईजी प्रशासन ने महिला कर्मी को मूल पद पर तैनात करने के बजाए राजपत्रित अधिकारी को ही हटा दिया। महिलाकर्मी की मृतक आश्रित के तहत ओएसडी मानव संपदा के पद पर नियुक्ति हुई थी। सूत्र बताते है कि इस महिलाकर्मी ने नियुक्ति के बाद से आज तक इस अनुभाग में न तो काम किया और न ही इस अनुभाग की कोई फाइल की है। इसको नियुक्ति के बाद से कृषि अनुभाग में तैनात कर रखा गया है।
एआईजी कारागार प्रशासन के पटल परिवर्तन के लिए जारी आदेश में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ मुखर्जी को मानवाधिकार, प्रोबेशन, सामा 2, विधि प्रकोष्ठ के साथ बजट दिया गया है। अधिष्ठान दो का प्रभार संभाल रहे संजीव सक्सेना को अभिलेख, मानव संपदा, जनसूचना, कृषि, नजारत, आधुनिकीकरण के पर्यवेक्षण का प्रभार सौंपा गया है। आधुनिकीकरण/नजारत का प्रभाव देख रहे प्रशासनिक अधिकारी पंकज पाठक को आधुनिकीकरण, अभिलेख/कृषि देख रहे प्रशासनिक अधिकारी श्रीराम को अभिलेख, गिरधारी लाल वर्मा को नजारत, स्वतंत्र प्रभा पाल को कृषि अनुभाग भेजा गया है। यह परिवर्तन बाबुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। |
सूत्र बताते है कि विभागीय जानकारी न होने के कारण कारागार मुख्यालय की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को अस्त व्यस्त कर रखा है। अराजपत्रित और राजपत्रित अधिकारी की अटेंडेंस में भी पक्षपात किया जा रहा है। मुख्यालय में राजपत्रित अधिकारियों और अराजपत्रित कर्मियों की अटेंडेंस के अलग अलग रजिस्टर बनाये गए है। सूत्रों का कहना है कि दो अराजपत्रित महिला कर्मियों की अटेंडेंस एआईजी प्रशासन के कैंप कार्यालय में लगवाई जाती है। जबकि अन्य की अटेंडेंस दूसरे स्थान पर लगवाई जा रही है। इन दोनों महिला कर्मियों के मुख्यालय आने जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। यह दोपहर 12 बजे आती हैं और शाम चार बजे ही निकल जाती है। यही नहीं कारागार मुख्यालय समेत प्रदेश की समस्त जेलों की प्रशासनिक व्यवस्था संभाल रहे एआईजी प्रशासन को जेलों और परिक्षेत्र कार्यालयों में पिछले 15-20 साल बाबू दिखाई ही नहीं पड़ते हैं। इन बाबुओं का विभाग में कॉकस बना हुआ है। इससे मुख्यालय के साथ परिक्षेत्र कार्यालयों और जेलों की गोपनीयता प्रभावित हो रही है। उधर इस संबंध में एआईजी प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया तो उनसे संपर्क ही नहीं हो पाया।


