आईजी साहब की साख पर बट्टा लगा रहे जेल अफसर!

बाजार से तीन गुना अधिक दामों पर खरीदा गया रॉ मैटेरियल की जांच के नहीं दिए आदेश आदर्श कारागार के उद्योग बने जेल अफसरों की कमाई का जरिया

आईजी साहब की साख पर बट्टा लगा रहे जेल अफसर!
आदर्श कारागार लखनऊ

लखनऊ। कारागार मुख्यालय के मुखिया आईजी जेल की ईमानदार छवि पर आदर्श कारागार के अधिकारी बट्टा लगा रहे है। जेल में कैदी पुनर्वास के लिए संचालित किए जा रहे उद्योग अधिकारियों की कमाई का जरिया बन गए है। उद्योग के लिए बाजार से दो से तीन गुना अधिक दाम पर खरीदे गए रॉ मैटेरियल की जांच के आदेश अभी तक नहीं दिए गए है। जेल अफसरों ने आईजी जेल को गुमराह करने के लिए भुगतान के तैयार बिलों को ट्रेज़री में लगाने से रोक दिया है। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में इन बिलों को लगाकर ठेकेदारों का भुगतान कराए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। अधिकारी रॉ मैटेरियल के अनाप शनाप दामों पर खरीद कर मोटा कमिशन पाकर जेब भरने की जुगत में लगे हुए है। उधर जेल अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों राजधानी के आदर्श कारागार में संचालित उद्योगों के लिए ठेकेदारों के माध्यम से रा मटेरियल मसलन प्रिंटिंग इंक, ग्रीस, मोबाइल ऑयल, बैंडिंग क्लॉथ, अबरी पेपर, दफ्ती, कपड़े सिलने का धागा सरीखे तमाम आइटमों की आपूर्ति कराई जाती है। सूत्रों का कहना है कि इन आइटमों की खरीद बाजार से दो से तीन गुना अधिक दामों पर की जा रही है। मसलन बाजार में 25 रुपए मीटर मिलने वाला वाइंडिंग क्लॉथ 65 से 75 रुपए मीटर खरीदा जा रहा है। इसी प्रकार 600 रुपए में मिलने वाला अबरी पेपर 2500 रुपए में, 12 रुपए में मिलने वाला कपड़ा सिलने वाला धागा 36 रुपए में एवं प्रिटिंग प्रेस के लिए आने वाले आइटमों को बाजार से 50 से 75 प्रतिशत अधिक दामों पर आपूर्ति कराई जा रही है। बेतहाशा दामों पर हो रही इस आपूर्ति की शिकायत मिलने पर पूर्व जेल अधीक्षक ने रेट वेरिफिकेशन कराने की बात कहकर भुगतान को रोक दिया था। इसके साथ ही यह निर्देश फाइलों में भी दर्ज कर दिया था। इस दौरान उनका तबादला कर दिया गया। पूर्व अधीक्षक के निर्देश के बाद भी प्रभारी जेल अधीक्षक ने ठेकेदारों के आपूर्ति किए गए सामनों के रेट का वेरिफिकेशन नहीं कराया है। रेट वेरिफिकेशन कराए जाने की बात तो छोड़िए ठेकेदारों के बाजार से दो से तीन गुना अधिक दामों पर आपूर्ति किए गए सामनों के लिए कई ठेकेदारों का भुगतान किया जा रहा है।

रिलीव होने के बाद भी जेल के चक्कर काट रहा डिप्टी जेलर

बीती 11 मार्च 2025 को आईजी जेल पीवी रामाशास्त्री के निर्देश पर एआईजी प्रशासन धर्मेंद्र सिंह ने आदर्श कारागार में तैनात डिप्टी जेलर अजीत सिंह को हटाए जाने का आदेश जारी किया। मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में डिप्टी जेलर अजीत सिंह को अग्रिम आदेश तक के लिए श्रावस्ती जेल पर अस्थाई ड्यूटी के लिए लगाया गया। सूत्रों के मुताबिक अस्थाई ड्यूटी पर लगाए गए डिप्टी जेलर को तीन दिन पहले रिलीव तो कर दिया गया। रिलीव होने के बाद भी डिप्टी जेलर जेल के चक्कर काट रहा है। जेल में प्रवेश करने वाले डिप्टी जेलर ने कई दस्तावेजों को भी कंप्यूटर से निकालकर अपने कब्जे में लिया है। इस संबंध प्रभारी अधीक्षक बृजेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

सूत्रों का कहना है कि मामला सुर्खियों में आने के बाद आदर्श कारागार के अधिकारियों ने आईजी जेल को गुमराह करने के बिलों के भुगतान को फिलहाल रोक दिया है। सूत्रों की माने तो अनाप शनाप तरीके से मनमाने दामों पर खरीदे गए रॉ मैटेरियल के बिल तो तैयार कर दिए गए हैं किंतु इन बिलों को भुगतान के ट्रेज़री में नहीं लगाया गया है। अधिकारी वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में इन बिलों का भुगतान कराकर मोटा कमिशन लेने की फ़िराख में लगे हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि मामला सुर्खियों में आने के बाद भी आईजी जेल ने दामों की जांच के लिए अभी तक कोई आदेश नहीं दिया है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करा दी जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। उधर इस संबंध में आदर्श कारागार का कोई भी अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचता नजर आया।