सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स कल्याण संघ ने की निंदा

पेंशनर के लिए शासन का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण: आरके भाटिया

सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स कल्याण संघ ने की निंदा
पेंशनर
  • पेंशनर के लिए शासन का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण: आरके भाटिया
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लखनऊ। राशिकरण की कटौती 15 वर्ष के स्थान पर 10 वर्ष 11 माह में करने की पेन्शनरों की  मांग को हर स्तर से स्वीकृत किया गया था उच्च न्यायालय ने भी पेन्शनरों की हजारों याचिकाओ पर शासन को सहानुभूति पूर्वक निर्णय लेने के निर्देश दिए थे और यह मानते हुए कि 10 वर्ष 11 माह की अवधि उचित है , कटौती पर  स्टे भी  दिए कि पेन्शनर की आर्थिक हानि रुक जाए।

शासन ने 25 सितंबर को जो आदेश दिया है संघ उसकी निन्दा करता  है तथा संघ के सदस्यो मे इस आदेश से आक्रोश भी है।

संघ स्तर से आज ही संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष इं आर के भाटिया ने मुख्यमंत्री, उप मुख्य मंत्री तथा वित्त मंत्री को संघ की भावनाओ से पत्र के माध्यम से अवगत करा कर वित्त विभाग के 25 सितंबर 2025 के आदेश  पर पुनर्विचार कर पेन्शनरों को न्याय प्रदान करने का अनुरोध किया है। श्री भाटिया ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त  न्यायाधीशों की इसी सम्बंध में योजित याचिका पर केन्द्र सरकार तथा समस्त प्रदेश सरकारों को जबाव देने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

इं भाटिया ने यह भी अवगत कराया कि 2006 से पूर्व पेन्शनर को एक रुपए की राशिकृत धनराशी के विरुद्ध 126 रुपए मिलते थे तथा उसकी वसुली 15 वर्ष में होती थी उस समय बैंक व्याज दर 14 प्रतिशत थी उसके उपरांत 2008 से पेन्शनर को एक रुपए के विरुद्ध 96 रुपए राशिकरण मिल रहा है तथा व्याज दर भी 6 प्रतिशत रह गई है तथा कटौती की अवधि वही 15 वर्ष है । जिससे पेन्शनर को प्राप्त राशी का का कई गुना अधिक वापस करना पड़ता है , जो पेन्शनर का आर्थिक उत्पीड़न भी है जो जनकल्याण कारी सरकार के लिए उचित नही है।

संघ द्वारा इस प्रकरण को गम्भीरतापूर्वक लिया गया था और भविष्य में भी सफलता हेतु हर सम्भव प्रयास  किया जाएगा।