मंत्री की सिफारिश से चौपट हुई कई जेलों की व्यवस्थाएं!

स्थानांतरित अधिकारियों की जगह नहीं हुई किसी अधिकारी की तैनाती कारागार मुख्यालय के एआईजी प्रशासन का अजब गजब कारनामा

मंत्री की सिफारिश से चौपट हुई कई जेलों की व्यवस्थाएं!
कारागार मुख्यालय

लखनऊ। कारागार मुख्यालय के अधिकारियों ने कारागार मंत्री की सिफारिश पर दर्जनों जेल अधिकारियों को स्थानांतरित तो कर दिया किंतु इन अधिकारियों की जगह किसी अधिकारी को तैनात नहीं किया। यह बात पढ़ने और सुनने में भले ही अटपटी लगे लेकिन कारागार मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे सच साबित कर दिया। विभाग में बेतरतीब तरीके से हुए इन तबादलों से कई जेलों की व्यवस्थाएं चौपट हो गई है। इस अव्यवस्था से अधिकारियों को जेल संचालन में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस अजब गजब कारनामे से एआईजी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि मोटी रकम लेकर किए गए तबादलों से कई जेलों की व्यवस्थाएं चौपट हो गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक स्थानांतरण सत्र के दौरान प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान के निर्देश पर शासन की ओर से एक पत्र जारी किया। विभाग के संयुक्त सचिव के जारी पत्र में महानिरीक्षक कारागार को निर्देशित किया गया कि विभाग के समूह क, ख, ग, घ के समस्त तबादलों की सूची विभागीय मंत्री से विचार विमर्श और अनुमोदन के बाद जारी की जाएगी। इस निर्देश के चलते तत्कालीन महानिरीक्षक कारागार सेवानिवृत होने से पहले एक भी अधिकारी और कर्मचारी का तबादला नहीं कर पाए। तत्कालीन महानिरीक्षक कारागार ने सेवानिवृत होने से एक दिन पहले मुख्यमंत्री से मिलकर इस मामले की शिकायत भी की थी।

वसूली के लिए खाली पड़ी आधा दर्जन जेल!
स्थानांतरण सत्र समाप्त होने के बावजूद प्रदेश की करीब आधा दर्जन जेलों में अधीक्षक तैनात नहीं है। अधीक्षकों की तैनाती को लेकर विभाग में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। सत्र के दौरान सिर्फ एक नव प्रोन्नत अधीक्षक का तबादला किया गया है। एक दर्जन नव प्रोन्नत अधीक्षकों को अभी भी तैनाती का इंतजार है। सूत्र बताते है कि नव प्रोन्नत अधीक्षकों की तैनाती के लिए स्थानांतरण सत्र का कोई मायने नहीं होता है। इन्हें प्रोन्नत होने के तुरंत बाद तैनाती दिए जाने का प्रावधान है। रही बात सत्र की तो सत्र के उपरांत अफसरों की तैनाती के लिए मुख्यमंत्री के अनुमोदन लिए जाने प्रावधान है। सूत्रों की माने तो अनुमोदन नव प्रोन्नति अधीक्षकों के नाम पर लिया जाएगा और इसकी आड़ में मोटी रकम लेकर चहेते अधिकारियों का कमाऊ जेलों पर तैनात किए जाने की संभावना है। यही वजह है कि अभी तक नव प्रोन्नत अधीक्षकों की तैनाती नहीं की गई है। वर्तमान समय में प्रदेश की फतेहगढ़ जिला जेल, बागपत जिला जेल, श्रावस्ती जिला जेल, बलरामपुर जिला जेल, चित्रकूट जिला जेल, बहराइच जिला जेल, सोनभद्र जिला जेल और महराजगंज जेल अधीक्षकविहीन है। कई पर अस्थाई ड्यूटी लगाकर तो कई जेलें जेलरों के भरोसे चल रही हैं।

सूत्रों बताते है कि स्थानांतरण सत्र समाप्त होने के दो दिन पहले विभागीय मंत्री ने विभाग के आला अफसरों के साथ बैठक की थी। बैठक में उन्होंने मातहत अधिकारियों को कई अधीक्षक एवं जेलरों को विभिन्न जेलों पर तैनात करने और कई को हटाने का निर्देश दिया था। निर्देश के तहत मंत्री का खास बनने के लिए एआईजी जेल प्रशासन ने अनाप शनाप तरीके से मोटी रकम वसूल कर दर्जनों जेलर और डिप्टी जेलर तबादले कर दिए। जिन जेलों के जेलर और डिप्टी जेलरों को हटाया गया उनके स्थान पर किसी की तैनाती नहीं की गई। चित्रकूट के जेलर संतोष कुमार वर्मा को केंद्रीय कारागार आगरा तैनात तो कर दिया गया किंतु स्थानांतरित जेलर के स्थान पर किसी जेलर को तैनात ही नहीं किया गया। इसी प्रकार शासन ने मंत्री के निर्देश पर चित्रकूट के अधीक्षक शशांक पांडेय को मैनपुरी जेल पर स्थानांतरित तो कर दिया किंतु इनके स्थान पर किसी को तैनात नहीं किया। इससे चित्रकूट जेल अधीक्षक और जेलर विहीन हो गई है। इसी प्रकार सोनभद्र के अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव को जिला कारागार वाराणसी पर समायोजित कर दिया गया लेकिन सोनभद्र में कोई अधीक्षक तैनात नहीं किया गया। यह जेल भी अधीक्षक विहीन हो गई। इस जेल पर तैनात जेलर जगदंबा दुबे की अधीक्षक पद पर प्रोन्नति हुई है। वर्तमान समय में सोनभद्र जेल भी अधीक्षक और जेलर विहीन हो गई है। यह तो बानगी है। इस प्रकार दर्जनों बेतरतीब तरीके के हुए तबादलों से कई जेलों की व्यवस्थाएं चौपट हो गई है। उधर इस संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।