दो प्रधान सहायक को हटाया तो एक को बचाया!

खबर का असर हुआ—बरेली में 16 साल से जमीं दो प्रधान सहायकों को हटाया गया, लेकिन आगरा में 18 साल से जमीं प्रधान सहायक पर कार्रवाई नहीं हुई। प्रमोशन के बावजूद न होने वाले तबादले और बाबुओं की मनमानी ने कारागार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो प्रधान सहायक को हटाया तो एक को बचाया!
कारागार मुख्यालय

खबर का असर

16 साल से बरेली में जमीं प्रधान सहायक हटाई गई
आगरा में जमी प्रधान सहायक पर नहीं हुई कोई कार्रवाई
खबर छपने के बाद मंत्री ने नहीं, डीआईजी ने की कार्रवाई
कारागार विभाग में प्रमोशन के बाद भी नहीं किए जाते तबादले

लखनऊ। शासन और कारागार विभाग के जेल परिक्षेत्रों में तैनात बाबुओं के प्रमोशन के बाद तबादले नहीं किए जाने की खबर का बड़ा असर हुआ है। बरेली परिक्षेत्र कार्यालय में लंबे समय से जमीं दो प्रधान सहायकों को हटा दिया गया है। एक प्रधान सहायक को कारागार मुख्यालय तो दूसरी को वाराणसी जेल परिक्षेत्र भेजा गया है। यह अलग बात है कि मुख्यालय डीआईजी ने आगरा जेल परिक्षेत्र में लंबे समय से जमीं प्रधान सहायक को नहीं हटाया गया है। हटाए जाने को लेकर परिक्षेत्र कार्यालय कर्मियों में तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक कारागार मुख्यालय में तैनात आईपीएस डीआईजी सुभाष शाक्य ने जेल परिक्षेत्र कार्यालयों में लंबे समय से तैनात प्रधान सहायकों का तबादला किया है। इसमें जेल परिक्षेत्र प्रयागराज से आगरा परिक्षेत्र कार्यालय से संबद्ध प्रधान सहायक किरन मिश्रा को वाराणसी जेल परिक्षेत्र कार्यालय और बरेली जेल परिक्षेत्र कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक स्नेहा शर्मा को कारागार मुख्यालय स्थानांतरित किया है। यह दोनों ही तबादले प्रशासनिक आधार पर किए गए है। यह स्थानांतरण आदेश स्थानांतरण सत्र समाप्त होने के एक दिन पहले ही जारी किया गया है।

उल्लेखनीय है कि बरेली जेल परिक्षेत्र कार्यालय में तैनात बाबू स्नेहा शर्मा कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक और वरिष्ठ सहायक से प्रधान सहायक पद के दो प्रमोशन किए गए। दो प्रमोशन देने के बाद भी इनका तबादला नहीं किया गया। इसी प्रकार आगरा जेल परिक्षेत्र में तैनात बाबू रंजना कमलेश को भी दो प्रमोशन दिए गए। इनका भी तबादला नहीं किया गया। 16 साल से बरेली जेल परिक्षेत्र में जमीं स्नेहा शर्मा को तो हटा दिया गया लेकिन 18 साल से आगरा जेल परिक्षेत्र में जमीं रंजना कमलेश को अभी तक नहीं हटाया गया है। बीते दिनों इसी परिक्षेत्र में तैनात बाबू पंकज शर्मा की मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि यह वार्डर संवर्ग के कर्मियों की विभागीय जांच समाप्त करने के नाम पर मोटी रकम वसूल करता है। इस शिकायत के बावजूद परिक्षेत्र के डीआईजी ने दोषी बाबू के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए उसे बचा लिया था। सूत्रों कहना है कि इन बाबुओं की स्थानांतरण सत्र में बल्ले बल्ले रहती है। परिक्षेत्र की जेलों में तैनात वार्डर संवर्ग के कर्मियों से मोटी रकम लेकर उनका स्थानांतरण मनमाफिक कमाऊ जेलों पर करवाने में इनकी अहम भूमिका रहती है। बाबू हेड वार्डर और वार्डर से हुई वसूली का कुछ हिस्सा मुख्यालय बाबुओं और कुछ अपने पास रखकर स्थानांतरण कराते है। बाबुओं का दावा है कि शासन और मुख्यालय में मजबूत पकड़ होने की वजह से उनका तबादला कराना तो दूर की बात उनका कोई कुछ बिगाड़ भी नहीं सकता है। इन बाबुओं की संपत्ति की जांच करा ली जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। उधर मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दो प्रधान सहायकों को हटाए जाने बात तो स्वीकार की है।