श्री पंचमुखी हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा से गूंज उठा नागेश्वर बाबा मंदिर परिसर
लखनऊ के एलडीए कॉलोनी स्थित श्री नागेश्वर बाबा मंदिर में मंगलवार को पंचमुखी हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा विधिवत संपन्न हुई। कलश यात्रा, हवन, भजन-कीर्तन और भंडारे के साथ श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।
भक्ति और उत्साह से सराबोर हुआ श्री नागेश्वर बाबा मंदिर, पंचमुखी हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न
लखनऊ। एलडीए कॉलोनी, सेक्टर-एच, कानपुर रोड स्थित श्री नागेश्वर बाबा मंदिर में मंगलवार को एक विशेष धार्मिक आयोजन के तहत श्री पंचमुखी हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा विधिवत रूप से सम्पन्न हुई। यह आयोजन पूरे क्षेत्र के लिए भक्ति और उत्साह से भरा एक विशेष अवसर बन गया।
सुबह मंदिर परिसर से कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ, जिसमें सैकड़ों महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु कलश सिर पर लेकर भक्ति गीतों के साथ शामिल हुए। कलश यात्रा के बाद वेद मंत्रों और पूजा विधियों के साथ पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद राष्ट्र और धर्म की समृद्धि के लिए हवन यज्ञ किया गया। हवन में उपस्थित भक्तों ने आहुति देकर पुण्य अर्जित किया और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
| श्री नागेश्वर बाबा मंदिर में श्री पंचमुखी हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा, प्राण प्रतिष्ठा के प्रश्चात सनातन धर्म व देश वासियों की सलामती के लिए किया गया हवन,हवन के उपरान्त भंडारे का किया गया आयोजन। |
मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया, जिसमें कॉलोनी और आसपास के गांव की महिलाओं ने भक्ति संगीत प्रस्तुत कर माहौल को और भी पावन बना दिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच मंदिर भक्ति रस में डूबा रहा।
इस आयोजन के मुख्य सेवादार श्री दिलीप कुमार ने बताया कि “मेरे पिताजी श्री रामाधार जी के स्वर्गवास के बाद मैंने मंदिर की जिम्मेदारी संभाली। 2018 में शनिदेव जी की प्राण प्रतिष्ठा की थी और अब बाबा की कृपा से पंचमुखी हनुमान जी का यह भव्य आयोजन सफल हुआ है।”
कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें खीर, कढ़ी-चावल और बेसन के लड्डू का प्रसाद वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की सराहना की।
श्री दिलीप कुमार ने यह भी बताया कि इस मंदिर में पिछले 50 वर्षों से नाग पंचमी पर दो दिवसीय मेला आयोजित किया जाता है, जो क्षेत्र की धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि उनकी माता सुमित्रा देवी का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ बना रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि क्षेत्रीय एकता और सांस्कृतिक समर्पण का भी प्रतीक बन गया।


