सत्ता परिवर्तन के बाद भी नहीं बदली वाराणसी जेल की व्यवस्था

पेशी पर बंदी ने लगाया जेलकर्मियों पर बेरहमी से पिटाई करने का आरोप प्रधान मजिस्ट्रेट ने जेल अधीक्षक से तलब की मेडिकल रिपोर्ट जेल और जेल के बाहर के अस्पताल से मेडिकल कराए जाने का दिया निर्देश

सत्ता परिवर्तन के बाद भी नहीं बदली वाराणसी जेल की व्यवस्था
जिला जेल वाराणसी

लखनऊ। वाराणसी जिला जेल में सत्ता परिवर्तन के भी बंदियों के उत्पीड़न की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। जेल में डिप्टी जेलर के उत्पीड़न का मामला अभी निपट भी नहीं पाया कि एक नया मामला सामने आ गया। बंदी की पिटाई के मामले में न्यायालय ने अधीक्षक से मामले की जांच कर रिपोर्ट तलब की है। इस घटना से जेल प्रशासन के अधिकारियों में खलबली मची हुई है।

एक बार फिर सुर्खियों में आई वाराणसी जिला जेल
करीब एक माह पूर्व वाराणसी जेल सुर्खियों में रही। जेल में तैनात एक महिला डिप्टी जेलर ने जेल अधीक्षक पर अभद्रता और उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके साथ ही जेल में बंद एक बंदी से मोटी रकम लेकर उसको जमानत पर रिहा कराए जाने की बात भी सुर्खियों में आई थी। इन प्रकरणों के बाद पहले जेल अधीक्षक को सोनभद्र जेल पर अस्थाई ड्यूटी लगाई गई और सोनभद्र के अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव को वाराणसी जेल का प्रभार सौंपा गया। फर्जी रिहाई के मामले में पूर्व अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया। वहीं जेल अधीक्षक पर आरोप लगाने वाली महिला डिप्टी जेलर को अस्थाई ड्यूटी पर प्रयागराज जिला जेल भेज दिया गया था। इन घटनाओं के बाद वाराणसी जेल एक बार फिर सुर्खियों में आ गई।



मिली जानकारी के मुताबिक हत्या के आरोप में गाजीपुर का एक बंदी जिला कारागार वर्ष में बंद है। शनिवार को इस बंदी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। पेशी के दौरान बंदी ने कपड़े उतार कर कमर और पीठ पर चोट के निशान गाजीपुर के किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट को दिखाए। इस बंदी का आरोप है कि जेलकर्मियों ने उसको बेरहमी से पीटा और मानसिक उत्पीड़न भी किया। इस पर प्रधान मजिस्ट्रेट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए जिला जेल के अधीक्षक को नोटिस जारी किया। उन्होंने आदेश दिया कि बंदी का मेडिकल मुआयना जिला जेल के अलावा बाहर के सरकारी अस्पताल में भी कराया जाए। साथ ही दोनों मेडिकल रिपोर्ट को 19 मई तक पेश किया जाए। आदेश के क्रम में शाम के समय जेलकर्मी बंदी को जिला अस्पताल ले गए और मेडिकल मुआयना कराया।

प्रयागराज जेल डीआईजी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कारागार विभाग में तैनात विभागीय डीआईजी की तर्ज पर आईपीएस अधिकारी भी वसूली करने से बाज नहीं आ रहे है। यह अधिकारी भी कमाई का कोई मौका छोड़ने को तैयार नहीं है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बीते दिनों प्रयागराज जेल परिक्षेत्र के प्रभारी उप महानिरीक्षक (डीआईजी) ने परिक्षेत्र के कौशांबी और प्रतापगढ़ जिला जेल का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान डीआईजी भारी मात्रा में आपत्तिजक वस्तुएं बरामद हुईं। इसके साथ ही जेलों में संचालित कैंटीनों में तमाम तरह की अनियमिताएं पकड़ में आई। प्रभारी डीआईजी ने दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए उन्हें सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया। यह मामला जेलकर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।



गाजीपुर के कोतवाली थाने में वर्ष 2021 में दर्ज हत्या और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित मुकदमे का आरोपी जिला जेल में बंद है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई पेशी के दौरान बंदी ने गाजीपुर के किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट को बताया कि जिला जेल में उसे प्रताड़ित किया जाता है। उसने अपना शर्ट उतार कर कमर और पीठ की चोट दिखाई। प्रधान मजिस्ट्रेट ने जारी नोटिस में कहा है कि बंदी के मेडिकल मुआयने की रिपोर्ट के साथ ही उसकी चोट की फोटो भी अविलंब गाजीपुर के किशोर न्याय बोर्ड को भेजी जाए। इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि क्षम्य नहीं होगी। प्रकरण के संबंध में जिला जेल के अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की जाएगी। मारपीट में यदि कोई जेलकर्मी दोषी पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।