ब्रज की रसोई कराती है आशियाना क्षेत्र में निःशुल्क भोजन वितरण

भारत जैसे बड़े देश में भुखमरी को ख़त्म करना एक बहुत बड़ा काम है, लेकिन एक समाज के तौर पर हमारी पहल भुखमरी के खिलाफ़ एक बड़ा योगदान दे सकती है और ऐसी ही एक पहल ब्रज की रसोई है जिसे इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी संचालित कराती है। अपने व अपनों के इस जन्मदिन / वैवाहिक वर्षगांठ व कुछ खास पलों को यादगार बनाकर जरूरतमंदो को भोजन कराने में सहयोग करें और पुण्य पवित्र कार्य का हिस्सा बनें

ब्रज की रसोई कराती है आशियाना क्षेत्र में निःशुल्क भोजन वितरण
ब्रज की रसोई द्वारा आशियाना क्षेत्र में भोजन वितरण

लखनऊ। पिछले कई सालों लखनऊ के आशियाना क्षेत्र में इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी द्वारा संचालित ब्रज की रसोई को चलते हुए देख रहे हैं। कॅरोना से पहले ये माँ की रसोई के नाम से भी चलती रही है ब्रज की रसोई प्रत्येक रविवार सांय 5 बजे बच्चों, अकिंचनों, निराश्रितों, गरीब, असहाय, बेबस, लाचार, दैनिक मजदूर, ऑटो, ठेला, रिक्शा चालक एवं आमजनों को भरपेट भोजन निःशुल्क बाँटा जाता है गुमटी बाले रामेश्वर चाचा बताते है कि भोजन बहुत ही स्वादिष्ट होता है और हर बार अलग अलग प्रकार के व्यंजन परोसे जाते है मै भी यहां के भोजन का स्वाद हर बार लेता हूं।

संस्था के सदस्य रजनीश मिश्रा बताते है UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में प्रति वर्ष 68.7 मिलियन टन खाना बर्बाद होता है, साधारण शब्दों में यह प्रति व्यक्ति लगभग 50 किलोग्राम होता है। खाना बर्बाद करने के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। ये आकड़ें चौकाने वाले हैं लेकिन सच है। भारत जहाँ करोड़ों लोग भूखे पेट सोने पर मजबूर है, वहाँ अगर इस खाने को बर्बादी से अगर हम बचा पाए तो हम एक बहुत बड़ी समस्या का समाधान कर पाएँगे।

इस काम को करना कैसे है इसका एक उदाहरण है इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी द्वारा संचालित ब्रज की रसोई।

"इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी द्वारा संचालित ब्रज की रसोई: खुशियों का संगम"

एड. अंजू गुप्ता का कहना है कि आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से, इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी द्वारा संचालित ब्रज की रसोई एक प्रेरणादायक पहल है जो लोगों के बीच प्यार और सहयोग की भावना को बढ़ावा देती है। यह संस्था निरंतर भूखे और गरीबों की मदद के लिए संघर्ष कर रही है। इस बार, चना, आलू और चावल की वितरण के माध्यम से, यह संस्था फिर से एक अनूठी पहचान बना रही है।

इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी द्वारा संचालित ब्रज की रसोई का ध्येय है समाज को साथ लाना और उसमें एकता और समर्थन की भावना बढ़ाना। इसके माध्यम से, लोग न केवल भोजन का आनंद उठा रहे हैं, बल्कि वे एक-दूसरे के साथ जुड़ रहे हैं और एक-दूसरे के साथ साझा कर रहे हैं। इस सामाजिक पहल में सहयोग करने के लिए, इच्छुक लोगों को संस्था से संपर्क करने का आमंत्रण दिया जाता है।

ब्रज की रसोई का यह प्रयास न केवल भूखे को भोजन प्रदान करता है, बल्कि उन्हें आत्मिक संतोष और सामाजिक समर्थन का भी अहसास कराता है। यह एक ऐसी संस्था है जो खुशियों का संगम बनाती है और लोगों को एक-दूसरे के साथ मिलकर जीने का संदेश देती है।

संस्था के एक और सदस्य आशीष श्रीवास्तव जी ने कहा 2023 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 125 देशों में भारत का 111वाँ स्थान था। भारत में करीब 20 करोड़ लोग रोज़ रात को भूखें पेट सोने पर मजबूर हैं। भारत जैसे बड़े देश में भुखमरी को ख़त्म करना एक बहुत बड़ा काम है लेकिन एक समाज के तौर पर हमारी पहल भुखमरी के खिलाफ़ एक बड़ा योगदान दे सकती है और ऐसी ही एक पहल इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी द्वारा संचालित ब्रज की रसोई है।

आपने अब तक कितने बच्चों, अकिंचनों, निराश्रितों, गरीब, असहाय, बेबस, लाचारों को खाना खिलाया है?

 इस सवाल पर संस्था के संस्थापक विपिन शर्मा हँसते हुए कहते हैं, "अब ये आप ही अनुमान लगा लीजिए, हमारा एक ही कथन है जो परमेश्वर ने हमको दिया है और वो है, एक ही ध्येय, प्राणी मात्र सेवा करना। अब प्रत्येक रविवार 500 से 600 लोगों को भोजन परोसा जाता है और पिछले कई बर्षो से निरंतर इस कार्य में वृद्धि हो रही है, हँसमुख बिंदास सरल स्वभाव मनमोहक छवि बाले बात-बात में हँसाने बाले विपिन भाई बोले बाकि हम तो हिंदी साहित्य के आदमी हैं गणित इतनी अच्छी है नहीं। " आप ही अनुमान लगा लीजिये।

संस्था के सदस्य गगन शर्मा कहते हैं, "परमेश्वर कि कृपा से अब लोग अपना जन्मदिन या अपने ख़ुशी के मौके ब्रज की रसोई के साथ मनाने के लिए दिन प्रतिदिन आगे आ रहे हैं और बच्चों, अकिंचनों, निराश्रितों, गरीब, असहाय, बेबस, लाचार, दैनिक मजदूर, ऑटो, ठेला, रिक्शा चालकों के लिए एक वक़्त के खाने का प्रबंध कर जाते हैं। कभी भीड़ में कोई उपद्रवी भी आ जाते हैं लेकिन संस्था ने कभी उनको खाना देने से इंकार नहीं किया, क्योंकि भगवान ने संस्था को पेट भरने का काम सौपा है फिर चाहे वो कोई भी या किसी भी धर्म या जाति का हो।" रसोई सभी को समान भाव से भोजन परोसती है।

आदरणीय चन्द्रभूषण तिवारी जी 2002 में संस्था का नामकरण से लेकर हमेशा मार्गदर्शन देने बाले आचार्य चन्द्रभूषण तिवारी (पेड़ बाले बाबा) बता दें आचार्य जी बिदेशो से भी (पर्यावरण बचाने की मुहीम) सम्मानित है तिवारी जी मानव धर्म के लिए हर सम्भव प्रयास करते है और निर्धन असहाय बच्चों की शिक्षा के लिए निशुल्क कई पाठशालाएं भी चलाते है।

पेड़ बाले बाला तिवारी जी सभी जनमानस से अपील करते है कृपया इस अभियान का समर्थन करें और अधिक से अधिक गरीब बच्चों की सेवा करने और उनके सपनों और आकांक्षाओं को पूरा कराने के लिए संस्था के कंधे से कंधा मिलाकर अभियान को मजबूत करने के लिए इस पुण्य कार्य का हिस्सा बनिये।

 बिशेष :- जो लोग पुराने कपड़े, पुरानी पुस्तके या अन्य सामान दान करना चाहे तो वह संस्था को मेल या व्हाट्सप्प के माध्यम से भी सम्पर्क कर सकते है। या जो लोग गुप्त सहयोग करना चाहते है वह संस्था के बैंक अकाउंट या QR कोड से भी सहयोग कर सकते है। संस्था 12A और 80G में रजिस्टर्ड है, अगर किसी भी दान दाता को टैक्स में छूट हेतु रसीद की आवश्यकता है हमें व्हाट्सप्प पर डिटेल भेजकर रशीद प्राप्त कर सकते है।

मेल आईडी [email protected] 

व्हाट्सप्प नंबर +91 9208108717

आज के इस कार्यक्रम में शामिल आचार्य चंद्रभूषण तिवारी, प्रेम आनन्द श्रीवास्तव, देवांश रस्तोगी, गगन शर्मा, आशीष श्रीवास्तव, रजनीश मिश्रा, रंजीत कश्यप, बिशु गौड़, नवीन कुमार, वरुण कश्यप,संग्राम सिंह गुप्ता, एड. अंजू गुप्ता सहित सभी समाजसेवियों का इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी के संस्थापक विपिन शर्मा ने आभार व्यक्त किया l