शिकायतों पर नकेल कसने के लिए शिकायतकर्ताओं पर कार्रवाई!
जेल विभाग में शिकायतकर्ताओं को किया जा रहा दंडित जेल विभाग की फाइलों में कैद हुआ व्हीसल ब्लोवर एक्ट
लखनऊ। भ्रष्टाचार के खिलाफ लाया गया व्हीसल ब्लोवर एक्ट का कारागार विभाग में कोई मायने नहीं रह गया है। यही वजह है कि इस विभाग में शिकायत करने वाले अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है। शिकायतकर्ताओं पर कार्रवाई होने का मामला विभागीय कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए ही शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही जा रही है। ऐसा तब किया जा रहा है जब व्हीसल ब्लोवर एक्ट में शिकायतकर्ताओं को प्रोटेक्शन दिए जाने की बात कही गई है। इस विभाग में इस एक्ट का कोई मायने नहीं रह गया है। यह एक्ट विभाग की फाइलों में सिमट कर रह गया है।
कारागार विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने वाले अधिकारियों और कर्मियों को सुरक्षा देना तो दूर की बात है, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शिकायत करने वाले ऐसे कई अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को दंडित किया जा चुका है। बीते नवंबर माह में राजधानी की आदर्श कारागार में दो डिप्टी जेलरों ने जेल में तैनात एक प्रशिक्षक की पिटाई कर दी थी। पिटाई का शिकार हुए प्रशिक्षक ने विभाग के मंत्री से लेकर आईजी जेल तक शिकायत की। शिकायत पर दोषी डिप्टी जेलरों को आयोग की कार्रवाई से बचाने के लिए 11 मार्च को डिप्टी जेलर अजीत सिंह को श्रावस्ती जेल पर अस्थाई ड्यूटी लगाई गई। इसके बाद डिप्टी जेलर डीपी सिंह को सिर्फ दो माह के अस्थाई ड्यूटी पर बाराबंकी जेल भेजा गया। मजे की बात यह है शिकायत करने वाले प्रशिक्षक को अग्रिम आदेश तक के लिए फतेहगढ़ जेल पर भेज दिया गया।
इससे पूर्व एटा जेल के सुरक्षाकर्मी ने जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार और अधिकारी के उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाते हुए एक वीडियो वायरल किया। वायरल वीडियो की परिक्षेत्र के प्रभारी डीआईजी ने नियम विरुद्ध तरीके से आगरा जेल अधीक्षक से जांच कराई। जांच के बाद आरोपी जेलर के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए सुरक्षाकर्मी को ही हटा दिया। इसी प्रकार वाराणसी जेल में व्याप्त महिला डिप्टी जेलर ने एक वीडियो वायरल किया उसे भी जेल से हटाकर प्रयागराज जेल भेज दिया। इस विभाग में व्हीसल ब्लोवर एक्ट के निर्देशों को दर किनार कर शिकायतकर्ताओं के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है। मामला विभागीय कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे है कि यही हाल रहा तो लोग शिकायत करना ही छोड़ देंगे। चर्चा तो यह भी हो रही शिकायतों पर रोक लगाए जाने के लिए अधिकारी यह कदम उठा रहे हैं।


