ऊंची पहुंच लगाकर बदलवाया आईजी जेल का आदेश!
एक माह बाद ही जौनपुर से मेरठ जेल पर अटैच हुआ आरोपी जेलर गाजियाबाद जेल से आईजी जेल ने किया था जौनपुर में अटैच
लखनऊ। ऊंची पहुंच और जुगाड़ हो तो आप अपने आईजी जेल का आदेश को भी बदलवा सकते है। ऐसा एक अजब गजब कारनामा प्रदेश के कारागार विभाग में प्रकाश में आया है। विभाग के मुखिया ने अपने ही आदेश को बदल कर एक कमाऊ जेल से पहले हटाया और फिर उसी को दूसरी कमाऊ जेल पर अटैच कर दिया। यह मामला विभागीय अफसरों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक करीब तीन माह पूर्व गाजियाबाद जेल में एक दबंग असरदार धनाढ्य बंदी की जेल प्रशासन ने अनाधिकृत तरीके से मुलाकात कराई थी। इसकी शिकायत मुख्यालय स्तर पर हो गई। शिकायत के बाद हुई जांच में अनाधिकृत मुलाकात कराए जाने के लिए जेलर केके दीक्षित और डिप्टी जेल वीके गौतम को दोषी करार दिया गया। इसके बाद हरकत में आए डीजी पुलिस/आईजी जेल पीवी रामाशास्त्री हरकत में आए। जांच में दोषी पाए गए जेलर केके दीक्षित को गाजियाबाद से हटाकर जौनपुर जेल और डिप्टी जेलर वीके गौतम को कासगंज जेल में तीन माह के लिए अटैच कर दिया गया था।
आईजी जेल नियम विरुद्ध लगा रहे अफसरों की ड्यूटी!
जेल मैनुअल में महानिरीक्षक जेल (आईजी ) को ट्रांसफर, निलंबन और अस्थाई ड्यूटी लगाने का कोई अधिकार ही प्राप्त नहीं है। जेल मैनुअल में आईजी जेल का कोई पद ही नहीं है। यह अधिकार महानिदेशक कारागार को दिया गया है। बगैर अधिकार के निलंबन, ट्रांसफर और अधिकारियों की अन्यत्र ड्यूटी लगाना ही पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। शासन इस मामले में आईजी जेल द्वारा की गई कार्यवाही का संज्ञान लेकर इसकी जांच कराकर क्या शासन इन मामलों में आईजी जेल के खिलाफ कोई कार्यवाही करेगा? यह सवाल विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि मामला अनुशासन से जुड़ा होने की वजह से विभाग के पीड़ित अधिकारी इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। कयास तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि आईजी जेल की कृत कार्यवाही के विरोध में यदि दंडित किए गए अधिकारी और कर्मी न्यायालय की शरण में गए तो कार्यवाही धरी की धरी रह जाएगी और दंडित अधिकारी को राहत भी मिल जाएगा। नए जेल मैनुअल में विभाग के अधिकारियों, कर्मियों का ट्रांसफर, निलंबन और अस्थाई ड्यूटी लगाने का अधिकार महानिदेशक कारागार को दिया गया है। शासन ने इन्हें सिर्फ आईजी जेल बनाया है। आईजी जेल को कर्मियों के ट्रांसफर, निलंबन और ड्यूटी लगाने का दायित्व नहीं सौंपा गया है। नए जेल मैनुअल में यह दायित्व महानिदेशक कारागार को सौंपे गए है। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान समय में महानिदेशक कारागार का प्रभार किसी भी अधिकारी के पास नहीं है। ऐसे में अफसरों की अस्थाई ड्यूटी लगाना व अन्य कोई कार्यवाही करना पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। आईजी की नियम विरुद्ध कार्यवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्र बताते है कि तीन माह के लिए गाजियाबाद से जौनपुर अटैच किए गए जेलर केके दीक्षित को पूर्वांचल की जौनपुर जेल रास नहीं आई। जेल पहुंचते ही उन्होंने यहां से हटने के लिए जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया। सिर्फ करीब एक से सवा माह तक जौनपुर में रहने के बाद उन्होंने जुगाड़ और सेटिंग गेटिंग के बल पर अपने आप को जौनपुर जेल से मंडलीय कारागार मेरठ पर अटैच करा लिया। जबकि इन्ही के साथ हटाए गए डिप्टी जेलर को कासगंज से अलीगढ़ जेल पर संबद्ध कर दिया गया है। चर्चा है इससे पूर्व भी लखनऊ जेल पर तैनात रहे इस जेलर ने मध्य सत्र में ही अपना स्थानांतरण एकाएक लखनऊ से गाजियाबाद करा लिया था। मेरठ जेल पर अटैच होने के बाद भी वह गाजियाबाद जाने की जुगत में अभी भी लगा हुआ है। जेलर ने अभी तक गाजियाबाद में आवास पर कब्जा जमा रखा है। जेल मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने केके दीक्षित के मेरठ में अटैच होने की पुष्टि तो की लेकिन इसके अलावा और कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।


