मेरठ में वेस्ट एंड रोड पर टेंपो पलटने से अगस्त्य उर्फ वासु की टूट गई सांसों की डोर, दीवान स्कूल की मेरिट में टॉप पर था होनहार वासु

वेस्ट एंड रोड पर टेंपो पलटते ही चीख-पुकार मच गई। वासु वहीं पर लहूलुहान हालत में बेहोश हो गया था। जैसे-तैसे लोगों ने टेंपो सीधा किया। टेंपो चालक वासु को बाइक पर अस्पताल ले गया। लेकिन तब तक मौके पर ही हल्ला मच गया कि वासु की मौत हो गई।…..

मेरठ में वेस्ट एंड रोड पर टेंपो पलटने से अगस्त्य उर्फ वासु की टूट गई सांसों की डोर, दीवान स्कूल की मेरिट में टॉप पर था होनहार वासु
मेरठ में सड़क हादसे में छात्र वासु की मौत के बाद विलाप करते परिजन।

मेरठ में वेस्ट एंड रोड पर टेंपो पलटने से हुए हादसे ने न्यू देवपुरी निवासी कौशल के परिवार की खुशियां ही छीन लीं। बेटे अगस्त्य उर्फ वासु का शव अस्पताल से घर लाया गया तो परिवार का विलाप देख सबका कलेजा कांप उठा। वासु के दोनों छोटे भाई दादा से लिपटकर चीखते रहे। वह बार-बार बस यही कह रहे थे कि उन्हें वासु से बात करनी है। बेबस दादा कुछ बोल नहीं पाए और उनकी आंखों से आंसू बहते रहे। बेटे की मौत की खबर लगते ही मां आशा गश खाकर गिर पड़ीं। कौशल आस्तीन में मुंह छिपाकर रोते रहे।

वेस्ट एंड रोड पर टेंपो पलटते ही चीख-पुकार मच गई। वासु वहीं पर लहूलुहान हालत में बेहोश हो गया था। जैसे-तैसे लोगों ने टेंपो सीधा किया। टेंपो चालक वासु को बाइक पर अस्पताल ले गया। लेकिन तब तक मौके पर ही हल्ला मच गया कि वासु की मौत हो गई। वेस्ट एंड रोड पर स्कूलों की छुट्टी का समय होने की वजह से बच्चों की भीड़ थी। जिसने भी यह हादसा देखा उसका कलेजा कांप उठा।

न्यू देवपुरी कॉलोनी निवासी कमल उस समय वेस्ट एंड रोड पर थे। कमल ने कॉलोनी के लोगों को फोन कर हादसे की जानकारी दी। कॉलोनी के आठ परिवारों में दहशत फैल गई। हर कोई वेस्ट एंड रोड की तरफ दौड़ पड़ा। वासु के साथ टेंपो में कॉलोनी का सिद्धार्थ, आराध्या, अदिति, रोहन, अभिनव, मान खन्ना और देव सवार थे। सभी के अभिभावक वहां पहुंच गए थे। अभिभावक बच्चों को प्राथमिक उपचार के लिए ले गए।

टूट गई सांसों की डोर : हादसे के बाद वासु को केएमसी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आखिरी वक्त तक लोग उसके लिए प्रार्थना करते रहे। डॉक्टरों ने वासु को मृत घोषित किया तो हरेक आंख नम हो गई। वासु का शव देख शिक्षिका भी रोने लगीं। अस्पताल से लेकर न्यू देवपुरी तक लोग रोते चले गए। खुद की थी टेंपो की व्यवस्था : जिस टेंपो से हादसा हुआ वह वासु एवं अन्य छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने अपनी तरफ से किराए पर लगा रखा था।

शव देख कांप उठा कलेजा : अस्पताल से वासु का शव न्यू देवपुरी में उसके घर लाया गया तो पूरे मोहल्ले के लोग पहुंच गए। वासु के साथ पढ़ने वाले बच्चे और उसके दोस्त भी आए। वासु का शव देख बच्चे रोते रहे। न्यू देवपुरी के ही 20 से ज्यादा बच्चे दीवान स्कूल में पढ़ते हैं। इन सभी के अभिभावकों की आंखों से भी आंसू टपक रहे थे, फिर भी सब वासु के परिवार को संभालने में लगे थे।

टीचर बोलीं... अब 59 बच्चों की जगह करनी होगी 58 की गिनती : वासु का शव देख उसकी क्लास टीचर तबस्सुम नाज रो पड़ीं। जुबां लड़खड़ा गई। नाज ने रोते हुए कहा अब मुझे 59 की जगह 58 बच्चों की गिनती करनी होगी। हाल ही में स्कूल में बैज सेरेमनी होनी थी। इसके लिए रिहर्सल में कक्षा 6-ए से वासु ने हिस्सा लिया था। वह सबसे पहले बैज बनाकर लाया और टीचर को दिए।

वासु बेहद होनहार था। अभावों से जूझते कौशल अपने तीनों बेटों वासु, प्रिंस और शिवम उर्फ आदित्य को बड़े मन से पढ़ा रहे थे। छह साल पहले दीवान स्कूल में प्रवेश की लिस्ट में वासु नंबर वन पर था। लगभग सभी विषयों में उसके अच्छे नंबर आते थे। वह अच्छा एथलीट भी था, वार्षिक एथलेटिक मीट में भी उसने शानदार प्रदर्शन किया था।